शनिवार, 6 दिसंबर 2008

मेरा देश महान

राम रहीम की बातें...नैतिकता की बातें...सच की दुहाई...लाखों कस्मे वादें...मुखौटो में इंसान....ये है मेरा भारत महान..................................
दोस्तों एक शायर ने कहा है..."इशरते कतरा है....दरिया मे फ़ना हो जाना...और दर्द का हद से बढ़ना है...दवा हो जाना"......हकीकत भी इससे जुदा नहीं है...हालात कुछ ऐसे हैं कि दर्द के लिए दवा ढूंढने की जरूरत ही नहीं रही...अब तो इस दर्द के बढ़ते जाने का इंतज़ार करना है...उस हद तक..जब तक ये खुद दवा न बन जाए॥
नहीं समझे आप। कहीं से आदर्श की घुट्टी पिलाने की कोशिश नहीसिर्फ ये उस हकीकत की ओर एक इशारा है।उस मुखौटे को उतारने की इल्तजा है। जो आज हर चेहरे ने चढ़ा रखा है।बम ब्लास्ट .......आतंकवाद की बिसात पर कत्ल का कारनामा.....इसके साथ ही शुरू होता है...नैतिक अनैतिक पर बात चीत का दौर...शोर गुल थमने का नाम ही नहीं लेता..........लोग बन जाते हैं संवेदनशील.......जग जाती हैं संवेदनाए...... पर बड़ा सवाल बड़ा मुद्दा ये है....कि क्या हमने झांका है कभी अपने गिरेबान में......जाना है अपनी उस मानवीय संवेदना को...जो जगती है एक खास मौके पर...कभी-कभी.....मौके-बेमौके...................या फिर आम जीवन में भी हम अपने उन मानवीय मूल्यों और संवेदनाओं के प्रति सजग रहते हैं.......हिन्दुस्तान की एकता...अखंडता...संप्रभुता को बरकरार रखने के लिए....क्या कुछ करते हैं हम........................................................................................बातें बहुत सी हैं......दिल में.....जेहन में .......बड़ा सवाल जारी रहेगा....................लेकिन आज के लिए बस इतना ही..................शरदिन्दु........