बुधवार, 10 फ़रवरी 2010
पाक का ना'पाक' खेल
बड़े बुजुर्गों ने कहा है...कि दूसरों के लिए गड्ढा खोदना...खुद के लिए भी खतरनाक साबित होता है....पड़ोसी देश पाकिस्तान ने इससे सीख ली होती..तो मौजूदा वक्त में उसे मुश्किलों से दो चार नहीं होना पड़ता...90 के दशक में जिस तालिबान को पाक हुक्मरानों ने जमीन पर उतारा....आज वो तालिबान पाक के वजूद पर खतरा बन कर मंडराने लगा है....अफगानिस्तान में राजनैतिक भूचाल लाने और अपनी पकड़ मजबूत करने का दांव पाकिस्तान के लिए बेहद महंगा साबित होने लगा है...आज हालात ऐसे बन चुके हैं...कि 'पाक' जमीन बारूद की चादर में लिपट गई है....रोजाना मुल्क के किसी ना किसी हिस्से से धमाकों की गूंज सुनाई दे जाती है...अब तो दुनिया के सबसे शक्तिशाली कहे जाने वाले...और खुद को पाकिस्तान का दोस्त ठहराने वाले अमेरिका की चिंता भी बढ़ गई है....कहीं परमाणु हथियारों पर दहशतगर्दों ने कब्जा जमा लिया...तो आगे क्या होगा...अमेरिका की ये फिक्र भारत को लेकर नहीं...ये फिक्र है अपनी हिफाजत को लेकर....आखिर कहीं ना कहीं वो भी तो नापाक साजिश रचने में भूमिका निभाता रहा है....दहशतगर्दों को कभी अमेरिकी हुक्मरानों ने भी हर संभव सहायता दी थी....जिससे दुनिया की दूसरी महाशक्ति माने जाने वाले रूस का खात्मा हो सके...और दुनिया अमेरिकी बादशाहत को स्वीकार करे....लेकिन एक दिन वो भी आया...जब अमेरिका को उन्हीं दहशतगर्दों के खूनी खेल का सामना करना पड़ा....उसके बाद ही आतंकवाद अमेरिका के लिए बड़ा मुद्दा बना.....खैर बात पाकिस्तान की करें...तो वजूद में आने के बाद ये मुल्क खुदा ,सेना और मौलाना के तीन खंभों पर टिका रहा है.....यकीनन हर मजहब का सम्मान होना चाहिए....लेकिन मजहब की किताबों में मौजूद इंसानियत के सबक को नजरंदाज करना...कहीं से बेहतर नहीं....पूरी दुनिया के इस्लामीकरण की बात भला किस बुद्धिजीवी को हजम हो सकती है....दूसरी तरफ पाक सेना की करतूत तो जगजाहिर रही है...लोकतंत्र की हत्या करने के लिए पाकिस्तान की सेना कुख्यात रही है...वहीं हर कदम पर फतवा से दो चार होना पाकिस्तानी अवाम की मजबूरी है....उन्हें क्या करना चाहिए...क्या नहीं ये मौलाना तय करते हैं.....जायज या नाजायज का फैसला मजहबी आधार पर किया जाता है...ऐसे में सहज ही समझा जा सकता है....कि पाकिस्तान में रहने वालों को किस कदर परेशानियों से दो चार होना पड़ता होगा...हैरत की बात ये है...कि खुद के मुल्क में अमन चैन का कोसों दूर तक पता नहीं...लेकिन पाक कश्मीर में कश्मिरियों के अमन और चैन की बात करता है....कितना बड़ा मजाक है यह....कोशिश तो ये होनी चाहिए....कि मौजूदा भयावह हालात काबू में आए.....साथ ही पिछली गलतियों से सबक लेकर....एक नई राह तैयार की जाए....तेज रफ्तार दुनिया की दौड़ में पिछड़ने की जगह.....उस रेस में शामिल होने की पहल की जाए....लेकिन ये बातें ख्वाब की तरह हैं.....जब तक हकीमुल्लाह बैतुल्लाह.....बैतुल्लाह मसूद.....मौलाना फजलुल्लाह......और मुल्लाह नजीर जैसे लोग खुद को खुदा का बंदा करार देकर नापाक खूनी खेल अंजाम देते रहेंगे....साथ ही पाकिस्तानी हुक्मरान अपनी नीतियां और सोच नहीं बदलेंगे.........
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